यात्री मार्गदर्शिका

अपने दर्शन की योजना बनाएँ

यह तीर्थ देवप्रयाग और टिहरी बाँध से लगभग समान दूरी पर स्थित है। यहाँ बताया गया है कि शिखर तक का मार्ग कैसे तय करें।

मार्ग, चरण-दर-चरण

ऋषिकेश पहुँचें

यात्रा का सामान्य आरंभ-बिंदु और निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन। यहीं से सड़क गढ़वाल की पहाड़ियों में चढ़ने लगती है।

ऋषिकेश → देवप्रयाग

बद्रीनाथ राजमार्ग पर लगभग 74 कि.मी., अलकनंदा के साथ चलते हुए देवप्रयाग के पावन संगम तक।

देवप्रयाग → जमणीखाल

लगभग 31–32 कि.मी. का पहाड़ी मार्ग आपको जमणीखाल की छोटी बस्ती तक ले जाता है, जो मंदिर के लिए सड़क-छोर है।

अंतिम चढ़ाई

टैक्सी स्टैंड से लगभग 1 कि.मी. की छोटी, मध्यम कठिनाई वाली चढ़ाई शिखर पर बने मंदिर तक पहुँचाती है — सहज गति से लगभग आधे घंटे का रास्ता।

यात्रा केंद्र व दूरियाँ

निकटतम हवाई अड्डाजॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून) (~120 कि.मी.)
निकटतम रेलवे स्टेशनऋषिकेश (~108 कि.मी.)
देवप्रयाग सेजमणीखाल सड़क-छोर तक ~32 कि.मी.
नई टिहरी से~101 कि.मी.
अंतिम चढ़ाई~1 कि.मी. ऊपर की ओर (मध्यम, ~30 मिनट)
ऊँचाईचन्द्रकूट पर्वत पर 2,277 मी
दूरियाँ अनुमानित हैं और सार्वजनिक यात्रा स्रोतों से संकलित की गई हैं। पहाड़ी सड़कें और मौसम बदलते रहते हैं — प्रस्थान से पूर्व वर्तमान मार्ग, सड़क की स्थिति और टैक्सी की उपलब्धता की स्थानीय स्तर पर पुष्टि अवश्य कर लें।

मंदिर का स्थान

चन्द्रबदनी देवी मंदिर चन्द्रकूट पर्वत के शिखर पर (30.3044° उ., 78.6196° पू.), टिहरी गढ़वाल में देवप्रयाग के निकट जमणीखाल के ऊपर स्थित है।

दर्शन समय

मंदिर सामान्यतः प्रतिदिन लगभग प्रातः 6:00 – सायं 7:00 तक खुला रहता है, और सूर्योदय व सूर्यास्त के समय आरती होती है। प्रातः और संध्या का समय दर्शन के लिए सबसे फलदायी — और सबसे सुंदर — होता है।

कब जाएँ

अप्रैल–जून और सितंबर–नवंबर में स्वच्छ आकाश, सुहावना मौसम और श्रेष्ठ हिमालयी दृश्य मिलते हैं। मानसून (जुलाई–अगस्त) में पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन हो सकते हैं; सर्दियों में बर्फ और ठंड रहती है, पर मंदिर शांत और भीड़-रहित होता है।

यात्रियों के लिए सुझाव