गाइड · पर्व

चन्द्रबदनी देवी में नवरात्रि

एक शक्तिपीठ के लिए देवी की नौ रातें वर्ष का आध्यात्मिक शिखर हैं — जब चन्द्रकूट का शांत शिखर मंत्रोच्चार, दीप-ज्योति और भक्ति से भर उठता है।

नवरात्रि में देवी की उपासना

नवरात्रि — देवी की नौ रातें — चन्द्रबदनी पर वर्ष का सर्वोच्च आध्यात्मिक पर्व है।

माँ चन्द्रबदनी देवी — जिसे चन्द्रबदनी भी लिखा जाता है — गढ़वाल के सबसे पूजित सिद्ध पीठों में से एक हैं, वह स्थान जहाँ परंपरा के अनुसार देवी सती का धड़ विश्राम को आया। माँ की पूर्ण शक्ति-रूप में उपासना करने वाले इस तीर्थ के लिए नवरात्रि से बढ़कर कोई पर्व नहीं — वे "नौ रातें" जब देवी के अनेक रूपों की आराधना होती है।

वर्ष में दो नवरात्रि

हिन्दू पंचांग में दो प्रमुख नवरात्रि होती हैं, और चन्द्रबदनी में दोनों मनाई जाती हैं:

सटीक तिथियाँ हर वर्ष चंद्र-पंचांग के अनुसार बदलती हैं, इसलिए यात्रा की योजना से पूर्व इनकी पुष्टि कर लें।

शिखर पर क्या होता है

इन नौ दिनों में मंदिर की दिनचर्या और गहन हो जाती है। गर्भगृह में श्री यंत्र की विशेष पूजा और विस्तृत अनुष्ठान होते हैं; पर्वतीय वायु में भक्ति-गीत और भजन गूँजते हैं, सामूहिक भंडारे लगते हैं, और सूर्योदय व सूर्यास्त की आरती वर्ष के अपने सबसे बड़े, सबसे भावपूर्ण समागम खींच लाती है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में चढ़ते हैं, और सामान्यतः हवाओं से घिरा शांत शिखर रंग और सामूहिक प्रार्थना का स्थल बन जाता है।

नवरात्रि और अप्रैल का मेला

वसंत का मौसम मंदिर का भव्य अप्रैल मेला भी लाता है — चन्द्रबदनी पर वर्ष का सबसे बड़ा समागम, जिसे मंदिर समिति और आस-पास के गाँव आयोजित करते हैं। चैत्र नवरात्रि और मेला मिलकर वसंत को पर्वत पर सबसे जीवंत समय बना देते हैं। अधिक जानें मेले व पर्व पृष्ठ पर।

नवरात्रि यात्रा की योजना

नवरात्रि की तिथियाँ हिन्दू चंद्र-पंचांग के अनुसार होती हैं और हर वर्ष बदलती हैं; मंदिर के पर्व-कार्यक्रम भी भिन्न हो सकते हैं। यात्रा से पूर्व तिथियों और व्यवस्थाओं की स्थानीय पुष्टि अवश्य करें।

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